Bodhgaya: महाबोधि महाविहार मुक्ति बौद्ध भन्तों द्वारा अनशन आंदोलन का 50 वां दिन, भारतीय राष्ट्रीय पार्टी ने दिया समर्थन, यूपी, बिहार, तेलंगाना, महाराष्ट्र आदि कई राज्यों से समर्थन में बड़ी संख्या में पहुंच रहे अनुयाई। और देश भर के भन्ते बुध अनुयाई आना शुरू हो गये हैं। कुशीनगर से लाखों की संख्या में अनुयाई अनशन स्थल के लिए रवाना। और नागपुर के हजारों संख्या में लोग मैदान में, सत्य की ज्वाला कई राज्यों में जल उठी इसे कोई रोक नहीं पायेगा। अब विश्व धम्म की शुरूआत हो गयी है।
यूपी, विहार, थाईलैंड पूर्ण समर्थन, तेलंगाना, महाराष्ट्र आदि कई राज्यों से बड़ी संख्या में पहुंच रहे अनुयाई
बोधगया, 12 फरवरी 2025: बोधगया स्थित भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली महाबोधि महाविहार को ब्राह्मण महंत के कब्जे से मुक्त करने के लिए चल रहे बौद्ध भिक्षुओं के अनशन आंदोलन का 50 वां दिन शुरू हो गया है, लेकिन बिहार सरकार और केंद्र सरकार के कान पर जू नहीं रेंग रही है। सरकार अंधी और बहरी भी है।
बौद्ध मंदिर को बौद्ध भिक्षुओं को सौंपने की भी मांग पूरी न होने के कारण भारत की छवि विश्व स्तर पर खराब हो रही है। अभी तक सरकार ने महाबोधि महाविहार बुद्ध विहार को ब्राह्मण महंत के कब्जे से मुक्त कर बौद्ध भिक्षुओं को सौंपने की मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया है। बोधगया टेंपल मैनेजमेंट कमेटी के द्वारा लगातार आंदोलनकारियों के खिलाफ षडयंत्र किए जा रहे हैं।।
अनशन पर बैठे बौद्ध भन्तों के साथ में पुलिस वालों ने अभद्रतापूर्ण व्यवहार। और सारी हदें पार कर दी।
महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन का नेतृत्व कर रहे विलास खरात ने हमें बताया कि आमरण अनशन आंदोलन को समर्थन देने हजारों लोग आंदोलन स्थल पहुंच रहे हैं और विभिन्न माध्यमों से आंदोलन को देश के करोड़ों लोगों का समर्थन मिल रहा है।
भारतीय राष्ट्रीय पार्टी के आरपी मौर्य ने किया समर्थन, ओबीसी एससी एसटी से बड़ी संख्या में पहुंचने का किया आवाहन
कल राजद विधायक सतीश दास आंदोलन को समर्थन करने पहुंचे थे और उन्होंने सरकार से महाबोधि महाबिहार गैर बौद्धों के कब्जे से मुक्त कर बौद्ध भिक्षुओं को सौंपने की बात कही थी। आज भारतीय राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष आरपी मौर्य के द्वारा आंदोलन को समर्थन किया गया और लोगों से आवाहन किया गया कि वह हजारों की संख्या में आंदोलन स्थल पर पहुंचें और महाबोधि महाविहार को ब्राह्मणों के कब्जे से मुक्त करने के लिए लड़ाई लड़ें। आरपी मौर्य ने हमें बताया कि सभी पिछड़े दलित आदिवासी 90% समाज के लोग भगवान बुद्ध में आस्था रखते हैं और यह स्थान हमारी आस्था का केंद्र है इसलिए इसे तुरंत बौद्ध भिक्षुओं को सौंपना चाहिए, पिछड़े दलित आदिवासियों बौद्धों की आस्था के स्थल पर ब्राह्मणों का क्या काम है।
कुशीनगर से लाखों की संख्या में बोधगया के लिए रवाना और नागपुर के हजारों संख्या के मैदान में
भारतीय राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष आरपी मौर्य ने मांग की कि बिहार सरकार तुरंत बोधगया टेंपल एक्ट 1949 को निरस्त कर नया एक्ट बनाए और महाबोधि महाविहार कमेटी में केवल बौद्ध भिक्षुओं को सदस्य बनाया जाए, दूसरे धर्म के पुरोहितों को तुरंत बाहर किया जाए और मैनेजमेंट कमेटी के सभी सदस्य भी बौद्ध बनाए जाएं।
महाराष्ट्र से भिक्षु भदंत ज्ञानज्योति महाथेरा सैकड़ो भिक्षुओं के साथ आंदोलन को समर्थन करने पहुंचे
महाराष्ट्र से भिक्षु ज्ञानज्योति महाथेरा सैकड़ों की संख्या में भिक्षुओं के साथ आंदोलन को समर्थन करने पहुंचे और उन्होंने कहा कि यह महाविहार बौद्धों की अमूल्य धरोहर है इस पर किसी गैरबौद्ध का कब्जा जायज नहीं है, उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए की बीटी एक्ट 1949 को तुरंत खत्म कर महाबिहार बौद्ध भिक्षुओं को सौंप दे और वहां पर रह रहे गैरबौद्धों को तुरंत बाहर करे।
गोरखनाथ परंपरा के योगी सूरज नाथ ने किया आंदोलन का समर्थन
गोरखनाथ परंपरा की प्रसिद्ध योगी सूरज नाथ के द्वारा महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन का समर्थन किया गया। सूरज नाथ ने एक संदेश जारी कर कहा कि भारत भूमि बुद्ध, सिद्ध और नाथ परंपरा की भूमि है, भारत भूमि का वैदिक पौराणिक परंपरा से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा की महाबोधि महाबिहार मुक्ति आंदोलन को वह अपना पूरा समर्थन देते हैं और महाबोधि महाविहार एक्ट बनाकर बौद्ध भिक्षुओं को उसमें शत प्रतिशत स्थान सुनिश्चित करने का समर्थन करते हैं।
महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश और बिहार, तेलंगाना से हजारों लोग समर्थन करने पहुंचे
विलास खरात ने बताया कि संपूर्ण भारत के ओबीसी एससी एसटी समाज के लोग मूल बौद्ध हैं और आज भी बौद्ध हैं और इसी को देखते हुए पूरे देश में पिछड़े दलित आदिवासियों का व्यापक समर्थन इस आंदोलन को मिल रहा है। महाराष्ट्र से हजारों की संख्या में लोग आंदोलन का समर्थन करने पहुंच रहे हैं और कल आंदोलन को समर्थन करने हजारों की संख्या में उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग पहुंचे और उन्होंने महाविहार को ब्राह्मण महंत के कब्जे से मुक्त कर बौद्ध भिक्षुओं को सौंपने की बात कही। आज बड़ी संख्या में तेलंगाना के लोग आंदोलन स्थल पहुंचकर आंदोलन को समर्थन कर रहे हैं और महाबोधि महाविहार को ब्राह्मण महंत के कब्जे से मुक्त करने के लिए आवाहन कर रहे हैं।
अनशन आन्दोलन पर बैठे बौद्ध भिक्षुओं के साथ पुलिस ने की बर्बरता
विलास खरात ने कहा कि एक तरफ आमरण अनशन की ओर सरकार का कोई ध्यान नहीं है तो दूसरी तरफ महाबोधि महाविहार मैनेजमेंट कमेटी का ब्राह्मण महंत किसी भी कीमत पर आंदोलन को खत्म करना चाहता है, इसके लिए वह विभिन्न षडयंत्र कर गलत तरीके अपना रहा है। और आंदोलन को बदनाम करने की साजिश भी करता है। उन्होंने कहा कि संजय मिश्रा देशद्रोही और राष्ट्रद्रोही है क्योंकि वह बुद्ध की विरासत को कब्जाकर उसमें ब्राह्मण मंदिर बनाकर उसे बर्बाद करना चाहता है जोकि एक विश्व धरोहर है।
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